एक दो तीन और जैकलीन… क्या बॉलीवुड क्रिएटिव क्राइसिस से जूझ रहा है ?

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जैकलीन फर्नांडिस अब माधुरी दीक्षित के मशहूर गाने ‘एक दो तीन ‘के रीमिक्स पर नाचती नजर आएंगी. फिल्म ‘तेज़ाब’ के इस गाने को अहमद खान साजिद नाडियाडवाला की फिल्म ‘बागी-2’ के लिए रीक्रिएट करेंगे जिसे जैकलीन पर फिल्माया जाएगा . इससे पहले जैकलीन जुडवा-2 में ‘ऊंची है बिल्डिंग’ के रीक्रिएशन पर थिरकती नजर आई थी . फिल्म संगीत के पंडित इसे रीमिक्स का दौर कहते हैं। जबकि हकीकत ये है कि ये शगल दौर की कैद से निकल कर अब दौरे का रूप लेता जा रहा है।

फिल्‍म ‘बार बार देखो’ के ‘काला चश्‍मा’ से लेकर शाहरुख खान की फिल्‍म ‘रईस’ के ‘लैला ओ लैला’ तक आपको ऐसे रीमेक गानों की लंबी फेहरिस्त दिख जाएगी. शाहरुख खान ने 1980 में प्रदर्शित फिरोज खान की फिल्म “कुर्बानी” के “लैला” का नया वर्जन पेश किया तो हृतिक रोशन की फिल्म ” काबिल ” में खुद संगीतकार राजेश रोशन फिल्म “याराना ” के अपने ही गाने “सारा ज़माना हसीनों का दीवाना ” को रिक्रिएट करते नजर आये। श्रद्धा कपूर और आदित्य रॉय कपूर की फिल्म ‘ओके जानू’ का गाना “हम्मा-हम्मा” 1995 में आई फिल्म ‘बॉम्बे’ में भी इससे बेहतर जादू जगा चुकी है। सना खान की एरोटिक फिल्म ‘वजह तुम हो’ में एक नहीं बल्कि ‘दिल में छुपा लूंगा, पल-पल दिल के पास जैसे तीन-तीन मशहूर गानों का ‘रीक्रिएशन’ इस्तेमाल किया गया.

इससे पहले अभिनेत्री सोनाक्षी सिन्हा और जॉन अब्राहम अभिनीत फिल्म फोर्स-2 में श्रीदेवी पर फिल्माया गया ” मिस्टर इंडिया “का गाना ‘काटे नहीं कटते’ को रीमिक्स किया गया। पिछले साल आई फिल्‍म ‘बार बार देखो’ के गाने ‘काला चश्‍मा’ के नए वर्जन को खूब पसंद किया गया।ये गाना साल 2005 में आए ‘तेनु काला चश्‍मा जचदा वे’ का नया स्‍वरूप है जो असल में एक पंजाबी गाना था.इंडियन क्रिकेटर मोहम्मद अजहरद्दीन की बायोपिक अजहर का गाना ओये-ओये साल के हिट रिमिक्स सॉन्ग में शामिल रहा.जो मूलतः राजीव रॉय की फिल्म “त्रिदेव ” का गाना था. ये तो चंद झलकियां हैं. लेकिन ये दौर यहीं ख़त्म होने का नाम नहीं ले रहा। फिल्म “जुड़वा-2 ” में मुकुल एस आनंद की फिल्म “हम ” के सुपरहिट गाने ‘चूमा चूमा’ दे दे  नया वर्जन सुनाई दिया .

फिल्म म्यूजिक के क्षेत्र में जिस तरह पुरानी बोतल में नयी शराब पेश की जा रही है फौरी तौर पर इसका मकसद शुद्ध रूप से कारोबारी नज़र आ रहा है लेकिन इसके पीछे कई सवाल खुद-ब-खुद मुंह बाए खड़े हो जाते हैं। मसलन एक ही फिल्म में तीन-तीन गाने रीमिक्स किये जा रहे हैं तो इन फिल्मों में संगीतकारों और गीतकारों की आखिर भूमिका क्या है ?क्या हिंदी फिल्म म्यूजिक क्रिएटिव क्राइसिस से जूझ रहा है ? क्या बॉलीवुड की रचनात्मकता अब ख़त्म हो चुकी है ? इन सवालों को लेकर खुद बॉलीवुड दो भागों में बंटा नज़र आता है। रीमिक्स के इस चलन का विरोध करते हुए गीतकार समीर अंजान का कहना है कि -हिंदी फिल्म संगीत पूरी तरह उल्टी दिशा में घूम चुकी है। एक फिल्म में चार-चार गीतकार और संगीतकार मिलकर “टांग उठा के” जैसी गीतों की रचना कर रहे हैं। शायद रचनात्मक दीवालियापन के विकल्प के रूप में पुराने गानों के रीमिक्स का उपाय ढूंढा जा रहा है। इन गानों में शब्दों से लेकर धुन तक सबकुछ जादुई है। जब बना-बनाया खाना मिल रहा हो तो कोई मेहनत करने की जहमत क्यों उठाये ? फिल्म्स दस,रा.वन और कसम से जैसी फिल्मों के गीतकार पंछी जालौनवी, समीर की इस राय से इत्तेफाक नहीं रखते। उनके मुताबिक़ -अगर पुराने अच्छे गानों से आज की युवा पीढी को रु-ब-रू कराया जा रहा है तो इसमें बुरा क्या है ? इसे लोकप्रिय पुराने गानों में नयी संजीवनी भरने की कवायद के तौर देखना ज्यादा बेहतर होगा।


कुर्बानी के “लैला” और डॉन के “खइके पान बनारस वाला” जैसे गीतों की रचना करने वाले संगीतकार कल्याणजी -आनंदजी फेम कल्याणजी विरजी शाह के मुताबिक़- ये शुद्ध रूप से कारोबारी फैसला है। पूंजी के रूप निर्माताओं की तिजौरी में पड़े इन गानों से ब्याज वसूल किया जा रहा है.सवाल अच्छा-बुरा का है ही नहीं। अगर म्यूजिक राइट्स धारक निर्माता इन गानों से और पैसा कमाना चाहे तो हम कर ही क्या सकते हैं। इन गानों में अब भी इतनी तासीर बाकी है कि आज का युवा इसे आज के गानों से ज्यादा पसंद करता है। जाहिर है आज के लोगों में पुराना मैजिक क्रिएट करने की क्षमता है ही नहीं। लेकिन ये दौर है और जल्द ही ख़त्म हो जाएगा। गायक अभिजीत के पुराने अलबम “कभी ख़्वाबों में ” को श्रोता जल्द ही अरिजीत सिंह और पलक मुंछाल की आवाज में सुन सकेंगे। अभिजीत के मुताबिक़-इस चलन को अच्छे गानों को ख़राब करने के चलन के तौर पर देखा जाना चाहिए। जिस तरह से पुराने गानों का नया वर्जन पेश किया जा रहा है उससे साफ़ है अब लोगों में सदाबहार गाने की रचना करने की काबिलियत ही नहीं रही। वैसे भी आज के गाने कल भुला दिए जाते हैं। अनुराधा पौडवाल का कहना है ‘ पुराने गानों का रीमेक नही बनना चाहिए इससे उन पुराने गानों की कीमत कम हो जाती है। अनुराधा की मानें तो रीमिक्स गाने बिल्कुल वैसे होते हैं जैसे किसी खूबसूरत बनारसी साड़ी को काटकर बिकिनी बना दिया गया हो।


हिंदी फिल्म जगत में म्यूजिक की अहमियत से सभी वाकिफ हैं। फिल्म का केवल एक पॉपुलर गाना भी किसी फिल्म के सुपर-डुपर हिट होने की वजह बनती रही है। ऐसे में संगीत को लेकर बरती जाने वाली उदासीनता और दीवालियेपन से यही लगता है कि बॉलीवुड खुद ही अपनी कब्र खोदने में जुटा हुआ है।

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