शबाना आज़मी और हेमा मालिनी की लड़ाई में अटक गई झांसी की रानी

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‘गांधी’ जैसी फिल्म बनाने वाले हॉलीवुड अभिनेता रिचर्ड एटनबरो इस फिल्म की सफलता के बाद ‘झांसी की रानी’ का बायोपिक बनाना चाहते थे. जैसे ही ये खबर बॉलीवुड में पहुंची सभी बड़ी अभिनेत्रियों ने लीड रोल पाने के लिए लॉबिंग शुरू कर दी. एटनबरो ने इस रोल के लिए दो नामों पर विचार किया. शबाना आजमी और हेमा मालिनी. लेकिन वो किसी फैसले पर नहीं पहुंच पा रहे थे. जबकि दोनों अभिनेत्रियों हर कीमत पर ये रोल पाना चाहती थी, इसलिए दोनों ने अपने अपने संपर्कों का इस्तेमाल शुरू कर दिया. इस छीना-झपटी वाली हरकतों से रिचर्ड इतने नाराज हुए कि उन्होंने फिल्म बनाने का इरादा ही छोड़ दिया.

शबाना आजमी निजी तौर पर रिचर्ड को जानती थी. वो पहले भी कई हॉलीवुड की फिल्मों में छोटे-मोटे रोल निभा चुकी थी. गांधी की यूनिट में भी उनके कई शुभचिंतक थे, जो शबाना को इस प्रोजेक्ट में लाने के लिए दिन-रात एक किये हुए थे. जाहिर है हर तरह से शबाना का पलड़ा भारी था. खुद को शबाना से पिछड़ते देख हेमा मालिनी ने निजी तौर पर रिचर्ड से मुलाक़ात की और उन्हें अपनी फिल्म ‘रजिया सुलतान’ देखने की गुजारिश की. रिचर्ड ने जब ये फिल्म देखी तो उन्हें हेमा की एक्टिंग जबरदस्त लगी और उन्होंने डिसाइड कर लिया कि हेमा ही उनकी झांसी की रानी बनेगी. उन्होंने इसका ऐलान भी कर दिया. इसके बावजूद शबाना ने हिम्मत नहीं हारी और रिचर्ड पर लगातार दबाव बनाए रखा लेकिन रिचर्ड टस से मस नहीं हुए. फिल्म शुरू भी हो गयी लेकिन जल्द ही फायनेंशियल क्राइसिस में फंस गई जिसके कारण शूटिंग बीच में ही रुक गई. आज भी ये फिल्म आधी बनकर ठंडे बसते में पड़ी हुई है.

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