जब देव आनंद ने जैकी श्रॉफ को शक्ति कपूर का चमचा बना दिया

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बॉलीवुड में जैकी श्रॉफ को सुभाष घई की देन माना जाता है, जबकि सच्चाई ये है कि जैकी फिल्म ‘हीरो’ से पहले ही अपनी फ़िल्मी पारी की शुरुआत कर चुके थे और ये फिल्म भी उन्हें तब मिली जब मॉडलिंग में उन्हें पहचान मिलने लगी थी. इन सब कामयाबी के लिए जैकी एक गुमनाम शख्स का शुक्रिया अदा करते हैं जिनकी तलाश खुद उन्हें भी पिछले 40 सालों से है.

साल 1982 में जैकी श्रॉफ ने रोजी-रोटी चलाने के लिए एक ट्रेवल एजेंसी में काम शुरू कर दिया था. यहीं उनकी मुलाक़ात एक advertising agency के अकाउंटेंट से शुरू हुई. उसने जैकी से कहा कि अगर वो फोटो खिंचवाने के बदले पैसे चाहते हैं तो कल उनसे आकर उनके ऑफिस में मिलें. जैकी जब दूसरे दिन उनके ऑफिस पहुंचे तो उनका एक फोटो सेशन किया गया और उन्हें बतौर मॉडल सेलेक्ट कर लिया गया. जैकी के इस मॉडलिंग की एक होडिंग बांद्रा में लगाईं गई थी जहां देव आनंद के बेटे सुनील आनंद की नजर उस होडिंग पर पड़ी. सुनील ने जैकी का पता लगाकर उन्हें अपने पिता से मिलने नवकेतन स्टूडियो बुलाया. सुनील आनंद की सिफारिश पर जैकी को देव साहब ने फिल्म ‘स्वामी दादा’ में अपने छोटे भाई का रोल दे दिया. दूसरे दिन जब वो शूटिंग के लिए पहुंचे तो उस रोल में देव साहब ने मिथुन चक्रवर्ती को कास्ट कर लिया था. जैकी को मायूस देख देव साहब ने उन्हें शक्ति कपूर के चमचे का रोल यानि विलेन बना दिया. इस तरह फिल्मों में जैकी की शुरुआत हो गई.

देव साहब के कहने पर जैकी ने वो छोटा-सा रोल कर तो लिया लेकिन खुद देव साहब को लगा कि ये शायद ठीक नहीं हुआ. उन दिनों सुभाष घई अपनी फिल्म ‘हीरो’ के लिए एक नए चेहरे की तलाश कर रहे थे. देव साहब ने घई से जैकी की सिफारिश करते हुए उनसे मिलने को कहा. घई को जैकी पसंद आए और उन्होंने जैकी को हीरो का हीरो बना दिया. फिल्म कामयाब रही और जैकी की गाड़ी चल पड़ी.

जैकी श्रॉफ को कामयाबी भले ही सुभाष घई के कारण मिली लेकिन जैकी कभी देव साहब का एहसान नहीं भूले. बाद में उन्होंने देव साहब के साथ ‘सच्चाई का बोलबाला’ सहित कई फ़िल्में की लेकिन कभी भी उनकी फिल्मों में काम करने के पैसे नहीं लिए. जैकी आज भी उस अनजान शख्स को तलाश रहे हैं जिनकी वजह से उन्हें अपने पहले विज्ञापन में काम करने का मौक़ा मिला था.

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