BIRTHDAY SPECIAL : एक्टिंग में अपना जौहर दिखाने में नाकाम रहे करण जौहर

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निर्माता-निर्देशक, एंकर, ड्रेस डिजाइनर, स्क्रिप्ट राइटर, टीवी होस्ट, ड्रिस्ट्रिब्यूटर… फिल्म निर्माण का कोई ऐसा क्षेत्र नहीं, जिसमें करण जौहर ने अपनी काबिलियत के झंडे ना गाड़ें हों, लेकिन अभिनय करण जौहर की ऐसी दुखती रग है जिसमें सफलता हासिल करने की हसरत उन्होंने अब भी पाल रखी है. करण जौहर ने सिनेमा में अपना आगाज 1989 में दूरदर्शन के सीरियल ‘श्रीकांत’ से किया. ये धारावाहिक तो सफल रहा लेकिन उन्हें कोई पहचान नहीं मिल पाई. आगे चलकर वो यशराज फिल्मस की क्रिएटिव टीम से जुड़ गए और यश चोपड़ा को असिस्ट करने लगे. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ में वो आदित्य चोपड़ा के सहायक हो गए, लेकिन एक्टिंग का मोह नहीं छोड़ पाए. आदित्य ने अपने इस दोस्त को इसी फिल्म में शाहरुख खान के दोस्त का रोल दे दिया. फिल्म खूब चली लेकिन आज भी इस फिल्म में करण को ढूंढना भूसे की ढेर में सुई ढूढ़ने जैसा ही है. ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ से ‘बॉम्बे वेलवेट’ तक करण ने करीब दस फिल्मों में बतौर एक्टर काम किया है, पर यही ऐसा क्षेत्र है जहां वो कोई पहचान नहीं बना पाए.

बहरहाल बतौर निर्देशक करण जौहर ने फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ से धमाकेदार शुरुआत की. पहली ही फिल्म की सफलता ने उन्हें नामचीन निर्देशकों की लिस्ट में शामिल कर दिया. इसके बाद उन्होंने ‘कभी खुशी कभी गम’, ‘कभी अलविदा ना कहना’, ‘माय नेम इज खान’ से लेकर ‘ऐ दिल है मुश्किल’ तक निर्देशक की सफल पारी खेली. दर्शकों की नब्ज पकड़ने में करण को महारत हासिल है. खबरों के मुताबिक इन दिनों करण ‘स्टूडेंट ऑफ द इयर’ के सीक्वल की तैयारी में जुटे हैं.

करण जौहर के पिता यश जौहर देव आनंद के बैनर नवकेतन में प्रोडक्शन मैनेजर थे. बाद में उन्होंने धर्मा प्रोडक्शन की स्थापना की. जिसने ‘दोस्ताना’ और ‘अग्निपथ’ जैसी सफल फिल्में बनाई. आखिरी दिनों में यश जौहर ‘गुमराह’ और ‘डुप्लीकेट’ जैसी फ्लॉप फिल्में बनाकर बुरी तरह कर्ज में डूब गए. कैंसर की बीमारी ने यश जौहर की जान ले ली. उसके बाद करण जौहर ने अपनी शख्सियत की खासियत से ना केवल अपने बैनर को कर्ज से निकाला बल्कि ‘कल हो ना हो’, ‘दोस्ताना’, ‘अग्निपथ’, ‘ये जवानी है दीवानी’ और ‘बद्रीनाथ की दुल्हनिया’ जैसी सफल फिल्मों के जरिए इस बैनर को बॉलीवुड का सबसे बड़ा प्रोडक्शन हाउस बना डाला. करण अब तक की सबसे सफल फिल्म साबित हुए ‘बाहुबली 2’ के को-प्रोड्यूसर भी हैं.

धर्मा प्रोडक्शन के अलावा करण जौहर जोया अख्तर, अनुराग कश्यप और दिबाकर बनर्जी के प्रोडक्शन हाउस में भी बराबर के साझीदार हैं.
करण जौहर के व्यक्तित्व के कई रंग हैं, जिन्हें एक साथ समझ पाना मुमकिन नहीं है. निर्देशक के रूप में वो नई-नई कल्पनाओं के सर्जक हैं, तो निर्माता के रूप नई-नई प्रतिभाओं के पालक. फिल्मी बिजनेस की गहरी समझ भी रखते हैं. विवादों से उनका गहरा नाता है. कब किस पर मेहरबान हो जाएं और कब किसके पीछे पड़ जाएं कहना मुश्किल है. उनकी बातें कभी-कभी मर्यादाओं की सीमा भी लांघ देती है. खासकर जब वो कोई अवार्ड शो या अपने टीवी शो ‘कॉफी विद करण’ को होस्ट करते हैं. करण कब किसके लिए रो दें और कब किसे गाली दे दें इनका अंदाजा तो खुद उन्हें भी नहीं होता. निर्देशक के रूप में करण को अपनी हर फिल्मों का टाइटल ‘के’ से रखना पसंद है, लेकिन बतौर निर्माता वो शायद ही ‘के’ को ज्यादा अहमियत देते हैं. करण जौहर का व्यक्तित्व कई विरोधाभासी भावों का घालमेल है जिसमें दो ट्विन्स के पालक पिता बनने के बाद थोड़ी परिपक्वता दिखने लगी है,

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