मीनाक्षी शेषाद्री की गलती ने माधुरी दीक्षित को बनाया स्टार

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कहावत है-‘दाने-दाने पर खाने वाले का नाम लिखा होता है’. माधुरी के स्टारडम को लेकर भी ये कहावत एक दम फिट बैठती है. 90 के दशक में करोड़ों दिलों पर राज करने वाली धक-धक गर्ल माधुरी दीक्षित ने बॉलीवुड में अपने तीन दशक से भी लंबे करियर में सफलता के वो आयाम छूए, जो एक आम इंसान के लिए छू पाना मुश्किल है. लेकिन माधुरी आज भी अनजान ही रहती अगर मीनाक्षी शेषाद्री ने एक गलती ना की होती.

एन.चंद्रा फिल्म ‘तेज़ाब’ को नाना पाटेकर, आमिर खान और मीनाक्षी शेषाद्री के साथ बनाना चाहते थे. नाना के साथ फिल्म के कुछ पोर्शन भी शूट किये गए थे. लेकिन उनका चंद्रा के साथ झगड़ा हो गया और उन्होंने फिल्म छोड़ दी. इसके बाद आमिर ने भी फिल्म को बाय-बाय कर दिया. बोनी कपूर की सिफारिश पर फिल्म में अनिल कपूर आ गए. और यहीं से मीनाक्षी के नखरे शुरू हो गए. मीनाक्षी अपने पेमेंट को लेकर चंद्रा से नाराज थी और बार-बार डेट्स ना होने का बहाना बना रही थी, जिसके तंग आकर चंद्रा ने उन्हें फिल्म से बाहर का रास्ता दिखा दिया. चंद्रा हीरोइन की तलाश में थे. उन्हीं दिनों चंद्रा राजश्री के प्रोडक्शन में जाकर कुछ नई लड़कियों के फूटेज देख रहे थे, ताकि उनमें से किसी को फिल्म के लिए फायनल किया जा सके. वहां उनकी मुलाक़ात रिक्कू राकेश नाथ से हुई जिन्होंने माधुरी के नाम की सिफारिश की .

माधुरी ने अपने करियर की शुरुआत 1984 में आई फिल्म ‘अबोध’ से की, लेकिन उन्हें कोई खास पहचान नहीं मिली. उन दिनों वो स्ट्रगल कर रही थी. चंद्रा को उनकी मुस्कान भा गई और उन्हें फिल्म में ले लिया गया. आखिरकार 1988 में माधुरी दीक्षित के करियर में वो मौका आया जब उन्हें स्टारडम का स्वाद चखने को मिला और ये मौका मिला फिल्म ‘तेजाब’ के रूप में. रिलीज होते ही ये फिल्म जबरदस्त हिट रही और इसने माधुरी को रातोंरात बड़ी स्टार बना दिया. इस फिल्म को चार फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले. यही वो फिल्म थी जिसके लिए माधुरी को बेस्ट एक्ट्रेस का पहला नॉमिनेशन मिला. अगर मीनाक्षी ने ये गलती ना की होती तो आज माधुरी को वो स्टारडम शायद ही नसीब हुआ होता.

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