Movie Review : Kaalakaandi

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एक रात, तीन कहानियां, जो कभी किया नहीं उसका खामियाजा भरने जैसे हालातों को दर्शाती है फिल्म कालाकांडी. फिल्म की कहानी तीन स्तर पर चलती है. फिल्म में मुंबई की एक रात की कहानी समाज के अलग-अलग वर्गों पर कैसे असर डालती है, यह कहने की कोशिश की गई है. एक तरफ रिलिन (सैफ अली खान) सीधे-सादे इंसान हैं. जिसने जीवन में किसी तरह का कोई नशा नहीं किया, कोई ऐसी हरकत नहीं की जिससे उसकी साख पर असर पड़े और ऐसे में एक दिन उसे अचानक मालूम होता है कि वह कैंसर से पीड़ित है. सैफ अली जब पता चलता है कि सिगरेट और शराब से दूर रहने के बावजूद उन्हें पेट का कैंसर हो गया है और ज्यादा से ज्यादा 6 महीने उनके पास है. गुस्सा होकर वह ड्रग्स ले लेता है.

ऐसे में वह जब घर पहुंचता है जहां उसके छोटे भाई अंगद (अक्षय ओबेरॉय) की शादी का फंक्शन चल रहा है. छोटा भाई अपनी गर्लफ्रेंड से मिलने के लिए किसी बहाने से होटल पहुंचता है और उसके गर्लफ्रेंड के पति के आ जाने के कारण वहां से भागकर बाहर आता है. दोनों भाई सड़कों पर भटक रहे हैं. इस बीच रिलिन को एक ट्रांसजेंडर मिल जाती है.

कुणाल रॉय कपूर, शोभिता के प्यार को लेकर असमंजस में है जबकि वो उसे बहुत प्यार करता है. शोभिता पीएचडी करने अमेरिका जा रही है. इसी बीच यह दोनों अपने दोस्त की बर्थडे पार्टी में एक रेस्टोरेंट में पहुंचते हैं. जहां पर शराब के साथ-साथ ड्रग्स भी इस्तेमाल में लाए जा रहे हैं और यहीं पुलिस की रेड पड़ती है.

तीसरी कहानी में दीपक डोब्रियाल और विजय राज एक अंडरवर्ल्ड डॉन के लिए वसूली करते हैं. उनकी नीयत खराब हो जाती है. दोनों डॉन का पैसा एक झूठी घटना बना कर उड़ा लेना चाहते हैं. फिरौती के करोड़ों रुपए को कैसे हजम किया जाए इसका प्लान बनाते-बनाते यह दोनों सड़कों पर भटक रहे हैं.

इन तीनों कहानियों का आपस में कैसे रिश्ता जुड़ता है और एक रात में समाज के अलग-अलग तबकों पर क्या फर्क पड़ता है यही दर्शाने की कोशिश इस फिल्म ‘कालाकांडी’ में की गई है.

तीनों कहानियाँ बहुत महीन हैं, इसलिए निर्देशक ने अपनी तरफ से फिल्म में ‘फील’ डालने की कोशिश की है. रात का मुंबई देखने का रोमांच है. लगातार बारिश हो रही है. कुछ सीन उन्होंने मजेदार बनाए हैं, लेकिन इनकी संख्या कम है.

सैफ अली खान के अलावा दीपक डोब्रियाल, विजय राज, सोभिता धूलीपाला, अक्षय ओबेरॉय और शहनाज़ ट्रेज़रीवाला का अभिनय अच्छा है. कुणाल रॉय कपूर कमजोर कड़ी साबित हुए. कालाकांडी में देखने को ज्यादा कुछ नहीं है.

इस तरह की फिल्में हम देख चुके हैं. और एक बार फिर कालाकांडी के रूप में फिर यही प्रयास किया गया है. इसे अक्षत वर्मा ने बनाया है जो ‘देल्ही बैली’ नामक सफल फिल्म बना चुके हैं. कालाकांडी उनकी एक और ब्लैक कॉमेडी है.

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