ऐडमैन की ‘पैडमैन’

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‘पैडमैन’ माहवारी के दिनों में महिलाओं को स्वच्छ रहने का संदेश देती है। महिलाओं के लिए सैनिटरी पैड क्या मायने रखता है। महिलाओं को सैनिटरी पैड की क्या जरूरत है फिल्म इस बारे में जागरूक करती है। यह फिल्म अरुणाचलम मुरुगनथम के जीवन पर आधारित है-ये सोच ग्रामीण इलाकों की नहीं बल्कि ग्रामीण इलाकों को लेकर शहरों की सोच का नतीजा है। इस मुद्दे को जिस तरह फिल्म में ढाल कर ग्लोरिफ़ाई किया गया है वो एक कारोबारी बचपने से ज्यादा कुछ नहीं।अगर इसे एक क्रांतिकारी फिल्म की तरह देखा जाए तो इस सवाल का जवाब भी ढूंढना चाहिए कि आखिर माहवारी के दिनों में होने वाली गंदगी से पीड़ित ज्यादातर शहरों की महिलाएं ही क्यों होती है। बहरहाल बात अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन की-

फिल्म की कहानी मध्य प्रदेश के महेश्वर बेस्ड है जहां का रहने वाला लक्ष्मीकांत चौहान (अक्षय कुमार) सबकी सहायता करने के लिए जाना जाता है। उसकी शादी गायत्री (राधिका आप्टे) से होती है, लेकिन शादी के बाद लक्ष्मीकांत को महिलाओं की माहवारी के दौरान होने वाली तकलीफ से परेशान होकर पेड बनाने की कोशिश करता है. लेकिन उसके इस प्रयास को घरवालों के साथ ही पूरा गांव भी गलत और गन्दा समझता है. लक्ष्मीकांत की पत्नी गायत्री भी उसे छोड़ के चली जाती है, फिर अपने जज्बे को पूरा करने के लिए लक्ष्मीकांत गांव से शहर जाता है जहां उसकी मुलाकात परी (सोनम कपूर) से होती है. परी लक्ष्मीकांत को अपना सपना पूरा करने के लिए प्रेरित करती है. लक्ष्मीकांत अपने मंसूबे में कामयाब होता है, सस्ते पैड्स बनाता है और पूरे गांव के साथ ही विदेश में भी मिसाल बन जाता है.

सबसे पहले बात इस फिल्म के निर्देशक आर बल्कि की। इससे पहले उन्होंने ‘चीनी कम’ ,’पा’ और ‘शमिताभ’ जैसी फ़िल्में बनाई जिसमें सूक्ष्म मानवीय भावनाओं पर उनकी गहरी पकड़ साफ़ दिखाई देती थी लेकिन पैडमैन में ऐसा लगता है कि अक्षय कुमार की पब्लिक इमेज के आस-पास कहानी बुनने के क्रम में जरूरी चीजें उनके हाथ से फिसल गई और फिल्म एक खालिस सोशल मैसेज बन कर रह गई। बाल्की को पता तो होगा कि सोशल मैसेज के लिए फिल्म से ज्यादा कारगर डॉक्यूमेंट्री होती है. खैर… अक्षय कुमार की पब्लिक इमेज ऐसी बन चुकी है कि अब वो जो भी करें सब लोगों को पसंद ही आएगा लेकिन हकीकत यही है कि इस तरह के किरदार में वो पूरी तरह मिसफिट हैं. राधिका आप्टे और सोनम कपूर ने अपना-अपना काम किया है. टॉयलेट -एक प्रेम कथा की तरह पैडमैन भी सौ करोड़ कमाने के बाद गम हो जाएगी क्योंकि फिल्म के सोशल मैसेज में वो गंभीरता दिखाई नहीं देती जिसकी दरकार थी। बहरहाल इस फिल्म से बॉलीवुड का भला हो ना हो लेकिन सेनेटरी पैड की डिमांड में उछाल जरूर आएगा और शायद ऐडमैन आर बाल्की पैडमैन के जरिये इसी मकसद को हल भी करना चाहते हैं.

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