Padmavati Movie Review:अद्भुत और बेमिसाल पेशकश

0
40

संजय लीला भंसाली की फिल्म पद्मावती कथ्य और शिल्प के आधार पर बॉलीवुड की सबसे बेहतरीन फिल्म का दर्जा हासिल करने का माद्दा रखती है. अगर पूरी फिल्म को तकनीक और शिल्प के आधार पर देखा जाए तो कहना पडेगा -अद्भुत और बेमिसाल पेशकश।

फिल्म की कहानी में इतिहास और कल्पना का जो समन्वय किया गया है उसमें इस बात की पूरी सावधानी रखी गई है कि फिल्म को फिल्म ही रहना दिया जाए इतिहास नहीं बनाया जाए. फिल्म के भव्य सेट, मंदिर, किला, किले के बाहर पड़ी सेना की छावनी के चलते ये फिल्म आपको दूसरी हिन्दी ऐतिहासिक फिल्मों से एक स्तर ऊपर की महसूस होगी। फिल्म पूरी तरह से राजपूताना गौरव का बखान करती है और खिलजियों को हिंसक, क्रूर और आक्रमणकारी दिखाती है। सहीं मायनों में फिल्म खिलजी या दिल्ली सल्तनत को कबीलाई, औरतों और सत्ता के लिए लड़ते, सनकी लोगों के झुंड की तरह दिखाती है। दूसरी तरफ राजपूतों को बेहद संयमित, नियम-कायदों से लड़ने वाला दिखाया गया है।

मलिक मोहम्मद जायसी के महाकाव्य पद्मावत पर आधारित ये फिल्म 13वीं शताब्दी में दिल्ली सल्तनत के खिलजी वंश और मेवाड़ के राजपूत सिसोदिया वंश के बीच लड़ी गई लड़ाई पर आधारित है। फिल्म शुरू होती है अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी को मार कर दिल्ली की शाही गद्दी पर बैठने वाले अलाउद्दीन खिलजी से जो हर बेशकीमती चीज को हासिल करना चाहता है। उसके पास पहुंचकर मेवाड़ से देश निकाला झेल रहा राजपुरोहित चेतन राघव उसे मेवाड़ की महारानी पद्मावती को नायाब बताते हुए हासिल करने के लिए उकसाता है और इसके बाद शुरू होती राजपूत और खिलजियों के बीच एक लंबी जंग। फिल्म में एक भी ऐसा दृश्य नहीं है जिसमें अलाउद्दीन खिलजी बने रणवीर सिंह और रानी पद्मावती बनी दीपिका पादुकोण एक साथ नजर आए हों। पूरी फिल्म में खिलजी रानी पद्मावती की झलक देखने के लिए उतावला नजर आता है। फिल्म का एक हिस्सा जिसमें खिलजी को शीशे में से रानी पद्मावती की झलक दिखाने की बात मानी जाती है वहां भी एक क्षण के लिए घूंघट में दिखाकर पर्दा बंद कर दिया जाता है।

एक्टिंग की बात करें तो रणवीर सिंह का अभिनय जबरदस्त है। उनका निजी सनकीपन इस किरदार में भी फिट बैठता है. उनसे बेहतर इस रोल को कोई और निभा ही नहीं सकता था। शाहिद कपूर की एक्टिंग भी शानदार है लेकिन वो इस तरह के रोल में मिसफिट हैं। उनके चेहरे पर कहीं से भी राजपूताना गौरव नजर नहीं आता। रानी पद्मावती के किरदार में दीपिका पादुकोणे से भी बेहतर विकल्प बॉलीवुड में मौजूद हैं। शायद भंसाली पद्मावती की सुंदरता की जायसी वर्जन समझ नहीं पाए। दीपिका ने अपनी एक्टिंग से इस कमी को ढंकने की पूरी कोशिश की है. मलिक काफूर के रोल जिम सरब के हिस्से में कई अच्छे दृश्य हैं और वो आपको फिल्म खत्म होने के बाद भी याद रहेंगे।

फिल्म में इन खूबियों के साथ कई कमियां भी हैं.मसलन राजा रत्नसिंह को खिलजी की कैद से छुड़ाने वाले गोरा बादल की वीरता को जल्दी से निपटा दिया। पद्मावती के जौहर के पूरे प्रकरण को दिखाने में भी जल्दबाजी बरती गई है. हालांकि भंसाली ने फिल्म की तकनीक को उभारने में ज्यादा ध्यान लगाया फिर भी ज्यादातर सीन अँधेरे में शूट किये गए जिसके वजह से कोफ़्त होती है. फिर भी संजय लीला भंसाली का ये प्रयास तारीफ़ के काबिल है.

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here