जब दिलीप कुमार ने मधुबाला के खिलाफ कोर्ट में गवाही दी

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दिलीप कुमार और मधुबाला का प्रेम बॉलीवुड के सबसे दुखद प्रेम कहानियों में से एक है. इस जोड़ी को बॉलीवुड की अब तक की सबसे बेहतरीन जोड़ियों में से एक माना जाता है लेकिन जैसा कि आम ज़िन्दगी में होता है इस प्रेम कहानी में भी एक विलेन था जो बेटी की बेशुमार कमाई और लोकप्रियता के सहारे अपने भारी-भरकम कुनबे की परवरिश करना चाहता था और यही मंशा मधुबाला की निजी ज़िन्दगी का कब्रिस्तान बन गया . रही सही कसर बी आर चोपड़ा की फिल्म ‘नया दौर’ ने पूरी कर दी जब दिलीप साहब मधुबाला के खिलाफ गवाही देने कोर्ट जा पहुंचे .

1957 में बी आर चोपड़ा ने दिलीप कुमार और मधुबाला को लेकर फिल्म ‘नया दौर’ की शुरुआत की .इस फिल्म की दस दिन की शूटिंग मुंबई में करने के बाद बी आर चोपड़ा आगे की शूटिंग के भोपाल जाना चाहते थे. लेकिन मधुबाला के पिता अयातुल्लाह खान अपनी बेटी को आउटडोर शूटिंग के लिए भेजने के लिए तैयार नहीं थे. दरसल तब तक मधुबाला और दिलीप कुमार के रोमांस की शुरुआत हो चुकी थी और ये बात खान साहब को बिलकुल पसंद नहीं थी. उनका ख्याल था की जब दोनों आउटडोर पर जाएंगे तो इनका प्यार और गहरा हो सकता है .शायद इसी ख्याल से वो राजी नहीं हो रहे थे जबकि चोपड़ा साहब अपनी जिद्द पर अड़े हुए थे .जब खान साहब नहीं माने तो चोपड़ा ने मधुबाला को फिल्म से निकाल कर उनकी जगह वैजयंतीमाला को ले लिया जिससे नाराज खान साहब कोर्ट पहुँच गए .

कोर्ट में फिल्म का भविष्य पूरी तरह से दिलीप कुमार की गवाही पर निर्भर था क्योंकि उनकी ही मौजूदगी में मधुबाला ने इस फिल्म के कॉन्ट्रेक्ट पर साइन किया था. खान साहब का ख्याल था कि दिलीप कुमार कभी मधुबाला के खिलाफ गवाही नहीं देंगे और उन्हें इसका हर्जाना जरूर मिलेगा .लेकिन हुआ ठीक इसका उलटा .दिलीप कुमार ने कोर्ट में चोपड़ा साहब का पक्ष लेते हुए मधुबाला के खिलाफ गवाही दे दी जिसके बाद खान को इसके लिए मोटा हर्जाना चुकाना पड़ा.इस घटना के बाद खान मधुबाला और दिलीप कुमार के बीच विलेन बन गए. दिलीप कुमार ने मधुबाला को पिता के खिलाफ जाकर शादी करने के लिए तैयार करने की काफी कोशिशें की लेकिन मधुबाला पिता के खिलाफ जाने के तैयार नहीं हुई और आखिरकार एक दिन ये रिश्ता पूरी तरह टूट गया.

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