इस गाने से हिल उठी थी ब्रिटिश हुकूमत, लगा दिया बैन

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साल 1950 में एक ऐसी फिल्म आई जिसके गाने से अंग्रेजों को उनकी सत्ता छिन जाने का डर था. इसके चलते अंग्रेजों ने इस गाने को फिल्म बनने से करीब 6 साल पहले ही बैन कर दिया था. ये फिल्म थी अशोक कुमार की ‘समाधि’.

फिल्म में अंग्रेजों के खिलाफ युवाओं से आह्वाहन किया गया था. इसी फिल्म का एक गाना था जिसने अंग्रेजी हुकूमत को भी थर्रा दिया था. अंग्रेजों ने इस गाने को फिल्म बनने से करीब 6 साल पहले ही बैन कर दिया था. ये गाना था ‘कदम-कदम बढ़ाए जा, खुशी के गीत गाए जा’….

युवाओं में इस गाने को सुनने के बाद देश के प्रति भक्तिभावना और कुछ कर गुजरने का जोश पैदा होता था. यह गीत अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ था इसलिए अंग्रेजों को जब इस गाने की भनक हुई तो उन्होंने इस गाने को बैन कर दिया. उनके हिसाब से जो इस गाने को गाता वह मुल्क से गद्दारी करता. इस गाने पर बैन हटा 1947, 15 अगस्त को जब भारत को आजादी मिली.

आपको बता दें, इस गाने को राम सिंह ठाकुर ने कंपोज किया था और पंडित वंशीधर ने लिखा था. वहीं फिल्म में इस गाने का मुखड़ा और गाने का टोन इस्तेमाल किया गया. इसके लिए म्यूजिक डायरेक्टर सीराम चंद्र साहब ने गाने के नए अंतरे कंपोज किए गए. बाकी गीत राजेंद्र कृष्ण ने लिखा. आज भी हमारे देश की आर्मी क्विक मार्च के दौरान इस गीत धुन को बजाती है.

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