Madhubala:मुहब्बत में हमेशा नाकाम रही मधुबाला

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मधुबाला को हिंदी सिनेमा की सबसे खूबसूरत अभिनेत्री माना जाता है. मधुबाला की परवरिश ऐसे माहौल में हुई जहाँ लड़कियों पर कई तरह की बंदिशें लागू रहती है. लेकिन पिता अयातुल्ला खान की लाख बंदिशों के बावजूद मधुबाला का दिल मचल ही गया गया। एक बार नहीं बल्कि 6-6 बार। लेकिन मधुबाला की बदकिस्मती देखिये उन्हें कभी किसी का प्यार नसीब नहीं हुआ। हालाँकि मधुबाला ने काफी कोशिशें भी की लेकिन हर बार उनके हाथ नाकामी ही लगी. बहरहाल डालते हैं नज़र मधुबाला की रोमांटिक लाइफ पर-

मधुबाला ने बचपन से ही दिल लगाना शुरू कर दिया था। किशोवस्था में उन्हें अपने पड़ोसी लतीफ़ से प्यार हो गया. लतीफ़ को जब दिल्ली से मुंबई जाना पड़ा तो मधुबाला ने उन्हें एक लाल गुलाब भेंट किया था. लतीफ ने उस गुलाब को किताब के पन्नों में 30 साल तक संभाल कर रखा। जब 23 फरवरी, 1969 को मधुबाला का निधन हुआ तो वे मुंबई गए और उनकी कब्र पर गुलाब की सूखी पंखुड़ियों को बिखेर दिया।लतीफ आईएएस अफसर थे और रिटायर होने के बाद भी 23 फरवरी को मधुबाला की कब्र पर फूल चढ़ाने जाते रहे। शायद यही एक सच्चा प्यार था मधुबाला के जीवन में।

निर्देशक केदार शर्मा ने फिल्मों में मधुबाला के पहला ब्रेक दिया था। स्क्रीन टेस्ट के दौरान देखते ही वे मधुबाला पर मोहित हो गए। पर मधुबाला उम्र के उस दौर में थीं जब शायद प्यार को ढंग से समझ नहीं सकती थीं। केदार शर्मा उनसे कहीं बहुत बड़े थे। उनका प्यार इकतरफा था। मधुबाला ने उनके प्यार को कभी स्वीकार नहीं किया, पर एक महान निर्देशक के रूप में दिल से उनका सम्मान करती रहीं।

1949 में ‘महल’ रिलीज हुई और सुपरहिट साबित हुई। इस फिल्म ने मधुबाला को शोहरत की बुलंदियों पर पहुंचा दिया। इस फिल्म के सेट पर ही कमाल अमरोही और मधुबाला में प्यार हो गया. और काफी परवान भी चढ़ा। मधुबाला के पिता चाहते थे कि दोनों शादी कर लें। पर कमाल अमरोही पहले से शादीशुदा थे और मधुबाला चाहती थीं कि वे पहले अपनी बीवी को तलाक दें। इसके लिए अमरोही तैयार नहीं हुए और यह प्यार किसी अंजाम तक नहीं पहुंच पाया।

बहुत कम लोगों को पता है कि 1950 तक जुल्फिकार अली भुट्टो साहब का इंडिया और पाकिस्तान, दोनों जगह रहना होता था। मुंबई में उनकी काफी प्रॉपर्टी थी। बांद्रा में उनका ‘माय नेस्ट’ नाम का मैंशन था। मुंबई में रहने के दौरान वह अक्सर ‘मुगल-ए-आजम’ के सेट पर पहुंच जाया करते थे, महज मधुबाला को देखने भर के लिए। आखिर मधुबाला भारत की सबसे खूबसूरत युवती थीं। मधुबाला भी भुट्टो के पसंद करने लगी थीं। पर भुट्टो की चाहत भी कोई रंग नहीं ला पाई, क्योंकि वे पहले से ही दो बीवियों के शौहर थे। वह तो मधुबाला से सिर्फ फ्लर्ट करना चाहते थे।

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दिलीप कुमार से मधुबाला का इश्क तब शुरू हुआ जब वह महज 17 साल की थीं। दिलीप कुमार उनसे काफी बड़े थे। दोनों ने कई हिट फिल्में दीं। मधुबाला के अब्बा जान ने दोनों को सेट पर मिलने की छूट दे रखी थी, पर वे बाहर नहीं जा सकते थे। इस रिश्ते का बड़ा ही ट्रैजिक अंत 1957 में हुआ, जब ‘नया दौर’ की भोपाल में होने वाली शूंटिंग के लिए मधुबाला को भेजने से उनके अब्बा ने इनकार कर दिया जिससे नाराज बीआरचोपड़ा ने उन्हें कोर्ट में घसीट लिया. कोर्ट में दिलीप कुमार ने मधुबाला के खिलाफ गवाही दी और ये सम्बन्ध यहीं ख़त्म हो गया.

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.प्रेमनाथ फिल्म ‘बादल’ में मधुबाला के नायक थे. शूटिंग के पहले ही दिन जैसे ही मधुबाला मेकअप रूम में गईं, प्रेमनाथ ने उन्हें एक लाल गुलाब और साथ में एक प्रेमपत्र भी दिया। मधुबाला ने प्रेमनाथ के प्यार को स्वीकार कर लिया। पर कुछ ही हफ्तों के बाद वह उनसे दूरी बनाने लगीं। पता नहीं, क्यों? शायद वह ट्रेजिडी किंग दिलीप कुमार को चाहने लगी थीं। खास बात यह है कि एक बार अशोक कुमार ने प्रेमनाथ को बताया कि मधुबाला ने उन्हें एक गुलाब और प्रेमपत्र दिया था। प्रेमनाथ सारा माजरा समझ गए।

दिलीप कुमार से ब्रेकअप के बाद मधुबाला ने किशोर कुमार से शादी कर ली थी। मधुबाला उन दिनों सफलता के शीर्ष पर थीं और किशोर कुमार आर्थिक संकट में फंसे थे। वे सोचते थे कि मधुबाला उनकी मदद करेंगी, पर तब तक उनका स्वास्थ्य इतना खराब हो चुका था कि वे कुछ कर पाने की स्थिति में नहीं रह गई थीं। किशोर कुमार की किस्मत तब चमकी जब ‘आराधना’ का गीत ‘मेरे सपनों की रानी…’ हिट हुआ। इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। पर दोनों की मैरिड लाइफ में कुछ भी नहीं था। बीमार मधुबाला बिस्तर पकड़ चुकी थीं। बीमारी लाइलाज थी। कुछ गहरे दोस्त और निकट संबंधी उनके आस-पास होते थे और 23 फरवरी, 1969 की सुबह महज 36 की उम्र में मधुबाला ने अंतिम सांसें लीं।
मधुबाला ताउम्र सच्चे प्यार की तलाश में भटकती रहीं और इसी अरमान के साथ इस दुनिआ को अलविदा कह गयी.

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