जब फिल्मों में काम पाने के लिए संजय दत्त की चमचागिरी किया करते थे अनिल कपूर

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1981 में जब सुनील दत्त ने बेटे संजय दत्त को फिल्म रॉकी से इंडस्ट्री में लांच करने की योजना बनाई तो अनिल कपूर फिल्मों में अपना स्ट्रगल शुरू कर चुके थे. जब उन्हें सुनील दत्त की इस फिल्म के बारे में पता तो उन्होंने भी इस फिल्म में काम पाने की कोशिशें शुरू कर दी और एक दिन ऑडिशन देने सुनील दत्त के ऑफिस जा पहुंचे. फिल्म में छोटा सा रोल था जो हीरो यानि संजय दत्त के दोस्त का था. अनिल कपूर चाहते थे कि किसी तरह ये रोल उन्हें मिल जाए. लेकिन अनिल ऑडिशन में फेल हो गए और उन्हें रिजेक्ट कर गुलशन ग्रोवर को ले लिया गया.

अनिल कपूर के लिए ये किसी सदमे से कम नहीं था. सुनील दत्त का बैनर और संजय दत्त की एंट्री होने के कारण फिल्म पहले ही सुर्ख़ियों में आ चुकी थी. मौक़ा हाथ से निकल जाने से अनिल कपूर काफी निराश थे, वो चाहते थे कि उन्हें फिल्म में कोई छोटा-मोटा रोल ही मिल जाए, इसलिए उन्होंने संजय दत्त के आस-पास मंडराना शुरू कर दिया ताकि वो अपने पिता से उनकी पैरवी कर दें. और संजय दत्त ने अनिल कपूर की चमचागिरी से खुश हो कर ऐसा किया भी लेकिन सुनील दत्त नहीं माने और अनिल कपूर की इस फिल्म में एंट्री नहीं हो सकी. बाद में उन्होंने फिल्म ‘वो सात दिन ‘ से Bollywood में एंट्री की.

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