जब राजीव कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे के प्यार के बीच दीवार बन गए राज कपूर

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राज कपूर हमेशा अपनी फिल्म की हीरोइनों के साथ रोमांस के लिए बदनाम रहे हैं. उनके बाद उनके तीनों बेटों रणधीर कपूर, ऋषि कपूर और राजीव कपूर ने भी पिता के इसी नक़्शे-कदम पर चलने की कोशिश की. मसलन रामपुर का लक्ष्मण के दौरान रणधीर कपूर रेखा से रोमांस करने लगे तो बॉबी के दौरान ऋषि कपूर को डिंपल  कपाड़िया से इश्क़ हो गया. राजीव कपूर ने भी दिव्या राणा और पद्मिनी कोल्हापुरे के साथ इश्क़ कर पिता की परंपरा को बरकरार रखा.

लेकिन मजे की बात ये रही कि इन सारी प्रेम कहानियों में राजकपूर ही विलेन साबित हुए और इन अभिनेत्रियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया. बहरहाल यहां बात हो रही है राजीव कपूर की, जो फिल्म ‘प्रेम रोग की शूटिंग के दौरान पद्मिनी कोल्हापुरे की जुल्फों में उलझ गए और उनका करियर चौपट होते-होते बचा.

पद्मिनी कोल्हापुरे ने फिल्म ‘सत्यम शिवम् सुंदरम’ में चाइल्ड आर्टिस्ट का रोल किया था. राज कपूर को उनकी एक्टिंग पसंद आई इसलिए उन्होंने पद्मिनी को ‘प्रेम रोग’ से लांच करने का फैसला किया. इस फिल्म में ऋषि कपूर हीरो थे, जबकि राजीव कपूर पिता के असिस्टेंड के रूप में काम कर रहे थे. शूटिंग के दौरान ही पद्मिनी और राजीव कपूर का रोमांस शुरू हो गया. राज कपूर जब भी राजीव को पुकारते वो पद्मिनी के मेकरूम रूम में पाए जाते. अनुभवी राज कपूर माजरा समझते देर नहीं लगी, लेकिन तब तक पद्मिनी और राजीव कपूर आगे निकल चुके थे.

पहले तो राज कपूर ने राजीव कपूर को समझाने की कोशिश की, लेकिन छुप-छुपकर वो पद्मिनी से मिलते ही रहे. जब राजीव कपूर नहीं माने तो राज साहब ने पद्मिनी को राजीव कपूर से दूर रहने या फिल्म छोड़ने को तैयार रहने को कहा. पद्मिनी कोल्हापुरे के करियर के लिए राज कपूर की फिल्मों से हाथ धोना एक बड़ा झटका साबित हो सकता था. इसलिए उन्होंने राजीव कपूर को भूलने में ही अपनी भलाई समझी और इस तरह एक प्रेम कहानी मंज़िल तक पहुंचने से पहले ही ख़त्म हो गई.


 

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