जब राजश्री प्रोडक्शन ने अमिताभ बच्चन को बेइज्जत कर बाहर निकाला

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अमिताभ बच्चन आज कामयाबी की उस मुकाम पर हैं जहां पहुंचना आसान नहीं है. लेकिन इस मुकाम को पाने के लिए बच्चन साहब ने कितने रिजेक्शन और INSULT झेले हैं, ये काफी कम लोगों को ही पता है. संघर्ष के दिनों में अमिताभ बच्चन हर बड़े प्रोडक्शन हाउस में जाकर काम मांगा करते थे .इसी सिलसिले में जब वो एक दिन राजश्री प्रोडक्शन पहुंचे तो राजश्री के मालिक ताराचंद बड़जात्या ने उन्हें बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा था कि एक्टिंग से बेहतर है कि अपने बाप की तरह कविताएं लिखा करो.

60 के दशक में राजश्री प्रोडक्शन के मालिक ताराचंद बड़जात्या का कद इतना बड़ा था कि न्यूकमर्स तो उनसे मिलने का सपना भी नहीं देख सकते थे. उस दौर में राजश्री लगातार फ़िल्में बना रहा था और कई बार उन्होंने नए लोगों को भी मौक़ा दिया था. महमूद की सिफारिश पर बड़जात्या के असिस्टेंड राज ग्रोवर ने अमिताभ को बड़जात्या से मिलाने का वादा किया और उन्हें समय भी मिल गया. मुलाक़ात के दिन अमिताभ बच्चन टाईट पेंट और शर्ट पहनकर पहुंचे जिसकी वजह से दुबले-पतले अमिताभ जरूरत से ज्यादा ही लंबे दिखाई दे रहे थे. राज ग्रोवर इससे नाराज तो हुए लेकिन समय की कमी को देखते हुए अमिताभ के पास कपड़े बदलने का समय नहीं था. ठीक 11 बजे दोनों बड़जात्या के सामने हाजिर हो गए.

ताराचंद बड़जात्या ने राज ग्रोवर को घूरते हुए पूछा-ये आदमी तो इतना लंबा है कि इसकी हीरोइन किसी ऊंटनी को ही बनाना पड़ेगा. और फिल्मों में ऊंटनी को हीरोइन बनाने का रिवाज नहीं है. बड़जात्या ने अमिताभ से पूछा, “अपने लिए कोई हीरोइन ला सकते हो..?” सकपकाए अमिताभ ने कोई जवाब ही नहीं दिया. ताराचंद ने अमिताभ को बाहर का रास्ता दिखाते हुए कहा, “एक्टिंग का ख्याल दिल से निकाल दो और अपने पिता की तरह कहानी-कविता लिखने में दिल लगाओ.” अपमानित अमिताभ वहां से निकल गए.

दो साल बाद अमिताभ बच्चन की फिल्म ‘आनंद’ आई और हिट रही. ताराचंद बड़जात्या एक पक्के बिजनेसमैन थे. जैसे ही आनंद हिट हुई वो अमिताभ बच्चन के पास जा पहुंचे और अपनी फिल्म ‘सौदागर’ में काम करने का ऑफर दिया. अमिताभ ने बिना किसी गिले-शिकवे के उनका ये ऑफर स्वीकार भी कर लिया. इस फिल्म में उनकी हीरोइन नूतन थी.

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